हर साल मार्च आते ही चीन की राजधानी पेइचिंग में महत्वपूर्ण पॉलिटीकल सीज़न शुरू हो जाता है, जहां देश की संसद और उसके सबसे बड़े सलाहकार मंच की वार्षिक बैठकें होती हैं। यह वह समय होता है जब चीन अपने आने वाले सालों की दिशा तय करता है। इसे कहा जाता है ‘दो सत्र’ या ‘लियांगहुई’। नाम भले सरल हो, लेकिन इसके मायने बहुत गहरे हैं। ‘दो सत्र’ सिर्फ एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं हैं। यह चीन के आने वाले वर्षों का खाका हैं। यहां देश की आर्थिक रफ्तार, तकनीकी दिशा और वैश्विक भूमिका तय होती है।
चाइनीज़ लालटेन फेस्टिवल चाइनीज़ लूनर न्यू ईयर का ही एक उत्सव है। चाइना में लालटेन फेस्टिवल को बहुत ही धूम-धाम से मनाया जाता है, वो इसलिए, क्योंकि यह लूनर न्यू ईयर का आखिरी दिन और वसंत की शुरुआत का प्रतीक है। चाइनीज़ भाषा में, पारंपरिक चाइनीज़ कैलेंडर के पहले महीने को “युआन” कहा जाता है, और प्राचाइना काल में, रात को “श्याओ” कहा जाता था। इस तरह लालटेन फेस्टिवल का चाइनीज़ नाम "युआन श्याओ" पड़ गया। लालटेन फेस्टिवल, या "युआन श्याओ फेस्टिवल", चाइना में एक खास उत्सव है। यह पारंपरिक चाइनीज़ कैलेंडर, आमतौर पर फरवरी या मार्च के पहले महीने के 15वें दिन होता है। इस साल, यह त्योहार 3 मार्च को होगा क्योंकि चाइनीज़ नया साल 17 फरवरी को शुरू हुआ था। यह त्योहार चाइनीज़ न्यूईयर समारोह के अंत का प्रतीक है, जो पहले लूनर महीने के पहले दिन शुरू हुआ था।
चीन की राजधानी बीजिंग में रविवार, 1 मार्च 2026 को रंगों का उत्सव पूरे उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया। प्रवासी भारतीय समुदाय ‘बीजिंग इंडियन्स’ के तत्वावधान में आयोजित इस होली समारोह में करीब 300 लोगों ने भाग लिया। ख़ास बात यह रही कि इस आयोजन में न केवल भारतीय समुदाय बल्कि बड़ी संख्या में स्थानीय चीनी नागरिकों और अन्य देशों के लोग भी शामिल हुए। रंग, संगीत और मेल-मिलाप के इस उत्सव ने बीजिंग की फिज़ा को कुछ देर के लिए भारतीय रंगों से सराबोर कर दिया।
आज की ज़िंदगी में AI कोई दूर की चीज़ नहीं रह गई है। सुबह आंख खुलते ही फोन देखना, मैप से रास्ता खोजना, ऑनलाइन पेमेंट करना या किसी ऐप से काम निपटाना. ये सब AI की ही देन है। हम रोज़ इसका इस्तेमाल करते हैं, कई बार बिना सोचे। लेकिन असली सवाल ये है कि आने वाले वक्त में यही AI हमारे समाज, हमारी सोच, हमारी संस्कृति और कानूनों को कैसे बदलेगा. आज दुनिया में बहस ये नहीं रह गई है कि सबसे तेज़ मशीन किसके पास है, बल्कि ये है कि इस ताकत का इस्तेमाल इंसानों की भलाई के लिए कैसे हो। “इंडिया-AI इम्पैक्ट समिट 2026” इसी सोच से जुड़ा हुआ है। यह समिट बताता है कि AI का भविष्य मिल-जुलकर बनेगा, अकेले दौड़ने से नहीं। 樱花视频免费观看.
चीनी राशि चक्र की कहानी बड़ी दिलचस्प है। इसमें बारह जानवर होते हैं और हर जानवर का अपना एक साल होता है, जो बारह साल बाद फिर लौटकर आता है। इस चक्र में घोड़ा सातवें स्थान पर है।
चीनी राशि चक्र की कहानी बड़ी दिलचस्प है। इसमें बारह जानवर होते हैं और हर जानवर का अपना एक साल होता है, जो बारह साल बाद फिर लौटकर आता है। इस चक्र में घोड़ा सातवें स्थान पर है। लेकिन घोड़ा सिर्फ एक गिनती नहीं है। चीनी संस्कृति में उसे बहुत सम्मान और महत्व दिया जाता है। इतिहास पर नज़र डालें तो साफ दिखता है कि इंसानी सभ्यता के विकास में घोड़े की भूमिका बहुत बड़ी रही है। युद्ध हो या संदेश पहुँचाना, खेती हो या शाही सवारी- हर जगह घोड़ा इंसान का भरोसेमंद साथी रहा है। यही वजह है कि चीनी नववर्ष में घोड़े का साल शुभ, शक्तिशाली और तरक्की का प्रतीक माना जाता है।
क्या आपने कभी सोचा है कि आने वाले समय में फिल्में कैसी होंगी. क्या वे वैसी ही रहेंगी जैसी आज हम देखते हैं, या फिर कुछ ऐसा होगा जो हमें चौंका देगा 樱花视频在线. आज सिनेमा की दुनिया एक बड़े मोड़ पर खड़ी है। खासकर चीन में, जहाँ फिल्मों का तरीका तेजी से बदल रहा है। इस बदलाव की वजह है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, यानी AI।.
जब भी चीन की अर्थव्यवस्था की बात होती है, ज्यादातर लोग टेक्नोलॉजी, फैक्ट्रियों और बड़े शहरों को याद करते हैं। लेकिन पिछले 10–12 साल में चीन ने एक ऐसे खेल-सेक्टर में जोरदार निवेश किया, जिसे पहले केवल अमीर लोगों का शौक माना जाता था, और वह है विंटर स्पोर्ट्स। आज यही बर्फ वाला खेल सेक्टर चीन की अर्थव्यवस्था में एक नए “सफेद सोने” की तरह चमक रहा है। चीन ने पिछले कुछ वर्षों में जिस तरह अपनी 'विंटर स्पोर्ट्स इंडस्ट्री' या 'आइस एंड स्नो इकॉनमी' को खड़ा किया है, वह किसी चमत्कार से कम नहीं है। आइए, आज की न्यूज़ स्टोरी में हम जानेंगे कि कैसे चीन ने बर्फ को सोने में बदल दिया है और कैसे महज दो दशकों में वह विंटर स्पोर्ट्स की दुनिया का नया सुपरपावर बनकर उभरा है।
सोमवार को चीन की राजधानी पेइचिंग स्थित भारतीय दूतावास में भारत का 77वां गणतंत्र दिवस पूरे उत्साह और गरिमा के साथ मनाया गया। यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि भारत के लोकतंत्र, संविधान और सांस्कृतिक मूल्यों का जीवंत प्रदर्शन बना।
खिलौने. सुनने में यह शब्द बहुत छोटा लगता है लेकिन इनका असर हमारे दिल पर बहुत गहरा होता है। एक छोटा-सा खिलौना हाथ में आते ही बच्चों के चेहरे पर जो स्माइल आती है, वो अनमोल होती है। चाहे वो गुड़िया हो, रिमोट वाली कार हो या कोई प्यारा-सा टेडी बियर, खिलौने हमें एक अलग ही दुनिया में ले जाते हैं। एक ऐसी दुनिया जहाँ कोई टेंशन नहीं, कोई शोर-शराबा नहीं, बस मस्ती और सुकून होता है। यहाँ तक कि हम बड़े भी जब बच्चों को खेलते देखते हैं, तो अपनी सारी परेशानियां भूल जाते हैं। तो चलिए, आज की न्यूज़ स्टोरी में आपको एक बहुत ही मजेदार और दिलचस्प किस्सा सुनाते हैं। 樱花视频网站.
आज की दुनिया एक ऐसे दौर से गुज़र रही है जहाँ हर बड़ी खबर किसी न किसी तरह ग्लोबल पॉलिटिक्स की शतरंज से जुड़ी हुई है। चाहे वह अमेरिका और वेनेजुएला के बीच बढ़ता तनाव हो, रूस को लेकर अमेरिका के नए कानून हों, या भारत और चीन जैसे उभरते देशों की भूमिका हो, हर चीज़ एक बड़ी तस्वीर की ओर इशारा करती है। सवाल यह है कि क्या ये सिर्फ़ अलग-अलग घटनाएं हैं, या दुनिया एक नए पावर शिफ्ट की ओर बढ़ रही है 樱花视频. इसी संदर्भ में, आज हम दिल्ली यूनिवर्सिटी के देशबंधु कॉलेज में प्रोफेसर डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह से बात करेंगे, जो ग्लोबल पॉलिटिक्स पढ़ाते हैं और इंटरनेशनल मामलों में खास पकड़ रखते हैं, ताकि इन जटिल ग्लोबल डायनामिक्स को बेहतर ढंग से समझा जा सके।.
सोचिए ज़रा… आप घर से बिना बटुआ लिए निकलें और फिर भी पूरा दिन आराम से कट जाए। भारत में यह काम UPI से होता है। लेकिन चीन में तो यह रोज़ की बात है। वहां लोग न कैश रखते हैं, न कार्ड। बस मोबाइल निकालिए और हर काम हो गया। चीन में अब दुकान हो, टैक्सी हो, मेट्रो हो या सब्ज़ी वाला, सब कुछ एक स्कैन पर चलता है। पिछले कुछ सालों में चीन इतनी तेज़ी से बदला है कि लगता है जैसे पूरा देश डिजिटल हो गया हो। एक समय था जब चीन को सिर्फ सस्ती चीज़ें बनाने वाला देश कहा जाता था। लेकिन आज वही चीन दुनिया की डिजिटल लैब बन चुका है, जहां नई टेक्नोलॉजी पहले टेस्ट होती है। तो चलिए, इस वीडियो में समझते हैं चीन की डिजिटल क्रांति की असली कहानी।
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